Home / Editorial / Indian Right wing politics and victims of slave mentality

Indian Right wing politics and victims of slave mentality

Noida, 24 July-2014(Wasim Akram Tyagi): Recently raised, “Force to eat” factor becomes a hot discussion topic every where such Parliament to tea stalls. It is true that Shiv Sena MP had forced to eat bread in the mouth of the IRCTC employee who was Muslim and carrying Ramadan fasting and the employee was telling own name , still  forced to eat. But it is also true that we see it only through the prism of Hindu-Muslim. Shiv Sena MP’s behavior is even more dangerous is our view that communal Hindu-Muslim who sees everything. Is not victims of slave mentality from both sides?

Indian Right wing politics and victims of slave mentality

Shiv Sena's modi-fied Modi a huge hit in Mumbai

What lawmakers wanted to do? What will be punished for it?

These 2 questions were asked on  the ABP News by anchor Neha which is extremely touching confession statement by BJP’s Sudhanshu Mittal though he was leaning toward the matter. But the VHP leader who dubbed laughable to argue that Parliament has collapsed, due to hurt the religious feelings of 20 million Muslims. Not only the ABPN shown the clean of damn and lost his cool several times on this channel. But the best part of the debate was the unraveling quiet visible of senior journalist Shesh Narain Singh. The remaining heads were sitting in the studio with his book with the constitution, he was recalled in this debate like this unworthy who do not have the manners to talk. The president of the Shiv Sena’s strong voice said, remaining fires……..

Well finally it happened what can be expected from the VHP! VHP leader suggested to the Congress and other secular parties should get registration in Pakistan or Bangladesh, because they just land Muslims.This is the mindset that he’s not concerned that the so-called nationalists in the country where non Muslim arrange Iftar party in honor of Rojadar.In a country where cigarettes is avoided in front of fasting Muslim by non-Muslim by thinking ashamed that so far it should reach hurt religious sentiments of Muslim friends. An MP in that country, which is labeled up that he broke normal courtesy and forcibly gives chapati to a poor fasting waiter. But feeling shame on the people of the organization rather than apologize reverse this injustice has been advocated.

Journalist Munawwar Rana said … A political thy Meyar is not falling, it’s my mosque’s minaret only Ghazals not falling and rising, and some fuckin lets say a lion gurdwara upon the frames that resembles the faces the wall of the mother’s face gurdwara will not fall. But these political people in politics who got the chance to do just because he was hell AC religious harmony. Voices why they read them? Why learn? Why assume that God Is One?

Finally we can say that it may be terrorism to searching religion and community in each and every criminal activities.

Original Editorial here

गुलाम मानसिकता के शिकार

ये सच है कि शिवसेना सांसद ने आईआरसीटीसी कर्मचारी के मुँह में रोटी ठूसने की कोशिश की , कर्मचारी अपना नाम बता रहा है, उसका रोजा है यह भी वह कह रहा है लेकिन इस सबके बावजूद उसके मुंह में जबरन रोटी ठूंसी जाती है . लेकिन ये भी सच है कि हमने इसे सिर्फ़ हिंदू-मुसलमान के चश्मे से देखा. शिवसेना सांसद के व्यावहार से भी ज़्यादा ख़तरनाक़ हमारा वो सांप्रदायिक नज़रिया है जो हर चीज़ में हिंदू-मुसलमान देखता है.

क्या सांसदों को ऐसा करना चाहिये थे ? क्या उन्हें इसकी सजा मिलेगी ?

यही सवाल था ABP न्यूज की एंकर नेहा का जिस पर भाजपा के सुधांशु मित्त्ल ने बेहद काबिले कबूल बयान दिया हालांकि उनका झुकाव पानी की तरह झील की ओर रहा। लेकिन वीएचपी के प्रकाश आग बबूला हुऐ बैठे थे, उन्होंने उस बहस को हास्यपद करार दिया जिसकी वजह से संसद ठप्प रही, जिसकी वजह से 20 करोड़ मुसलमानों के साथ तमाम दूसरे धार्मिक लोगों की भावनाओं को भी ठेस पहुंची।

इतना ही नहीं प्रकाश ने इस ABP को साफ – साफ कहा कि धिक्कार है इस चैनल पर और कई बार आपा खो बैठे। मगर इस बहस का सबसे बेहतरीन पहलू था शान्त से दिखने वाले मगर लेखनी में सरकारों की बखिया उधेड़ने वाले वरिष्ठ पत्रकार Shesh Narain Singh का। शेष सर अपने साथ संविधान की किताब लेकर स्टूडियो में बैठे थे उन्होंने कहा कि इस बहस में एसे अयोग्य को बुला लिया गया जिन्हें बात करने का सलीका ही नहीं है।

इस पर शिवसेना के अध्यक्ष आग बबूबला होते शेष सर ने कड़क आवाज में कहा ….. सुनिये आप …. बात सुनिये….। खैर आखिर में वही हुआ जिसकी वीएचपी से उम्मीद की जा सकती वीएचपी के प्रकाश ने कहा कि कांग्रेस और दूसरे सैक्यूलर दलों को अपना रजिस्ट्रेशन पाकिस्तान या बंग्लादेश में करा लेना चाहिये क्योंकि इन्हें सिर्फ देश के 12 करोड़ मुस्लिमों की फिक्र है। यह मानसिकता है तथाकथित राष्ट्रवादियों की उन्हें इससे सरोकार नहीं कि जिस देश में रोजेदारों के सम्मान में गैरमुस्लिम रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन कराते हों, जिस देश में रोजेदार के सामने कोई गैर मुस्लिम सिगरेट पीने में भी शर्म इसलिये महसूस करता हो कि कहीं इससे मेरे मुस्लिम दोस्त की धार्मिक भावना को ठेस न पहुंच जाये।

उस देश में एक सांसद, जिसके ऊपर लेबल लगा है कि वह जनप्रतिनिधी है एक गरीब वेटर का रोजा जबरन तुड़वा देता है। लेकिन इस संगठन के लोगों को इस पर बजाय शर्म के बजाय माफी मांगने के उल्टे इस कुकर्म की वकालत की पड़ी है। देश की छवी विश्व स्तर पर खराब करने में यह संगठन कोई कमी नहीं छोड़ रहा है। मुनव्वर राना ने कहा था कि … ए सियासत तेरा मेयार न गिरने पाये मेरी मस्जिद है ये मीनार न गिरने पाये इतना ही गजल और बढ़ती है, और उसका एक शेर गुरद्वारे की चौखटों से टकराकर कुछ यूं कह देता है कि मिलता जुलता है सभी चेहरों से मां का चेहरा गुरद्वारे की भी दीवार न गिरने पाये।

मगर ये सियासी लोग जिन्हें सियासत करने का मौका सिर्फ इस वजह से मिल गया क्योंकि उन्होंने धार्मिक सदभाव की एसी तैसी की थी। वे उन अल्फाज को क्यों पढ़ेंगे ? क्यों जानेंगे ? क्यों समझेंगे कि God Is One ? पर वास्तव में हर बात में मजहब और सांप्रदायिकता तलाशना ही सबसे बड़ा आतंकवाद है ।