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Exited the Humanity and sympathy from NDA led Indian Government

Noida, 17 July-2014,Wasim Akram Tyagi : Exited the Humanity and sympathy from NDA led Indian Government.Unlimited bombing on Palestine is continuing from last a few weeks where the NDA led Government of India has refused to intervention by saying that they will not condemn these attacks.

Exited the Humanity and sympathy from NDA led Indian Government

Exited the Humanity and sympathy from NDA led Indian Government

As the other opposition parties have announced saddened by the suffering of Palestinians,but the NDA Government doesn’t consider a matter of discussion. The Government has opposed the proposals of discussion on the Gaza massacre and refused to bring social and humanitrian concerns attached to the poem like  Krishnapallvi said,“Gujrat ki kashai aur Gaza ki kashai apos mein bhai -bhai hai”  [butcer of gujarat and butcher of Gaza are brothers] which comes openly with this move of government.

India and all over the world have protested the Gaza massacre and the opposition parties were willing to pass a proposal to condemn the Gaza massacre but the BJP Government’s Parliamentary Affairs Minister Venkaiah Naidu directly dismissed it outright.

Although social worker Avinash Kumar Pandey says that it is possible to condemn the civilian killing in Gaza , not only a nation but also any peace and justice loving people. It doesn’t need to become a sympathizer of Palestine but a human, we should condemn such barbaric innocent Gaza killings.

However, the time has changed it’s rout . Therefore, no wonder that over the past six decades, India’s stand with Palestine but present NDA Government to act against traditional support by refusing even to condemn Israeli bombing and Civilian killing. Of course, the External affair ministry spokesman says in official statements that they expressed concern to the citizens killing but no mourn about the killing of innocent Palestinians.  Israeli Ambassador Samar says via a funny status that India should discover the terrorists and invader comparison.

But common Indian people what they want to say about Palestine? Of course India should clear the stand and go to immediately stop Israeli invader as India is the first country to who recognized Palestine. It is known to all that Yasser Arafat is living in the heart of every common people in India.

Significantly so far in these attacks,200+  killed and 3000+ injured including a large number of them are children.  Social media and Palestine TV uploaded large number of mournful Images and video every hour which are enough to show how Israeli terrorism is to wreak havoc in look at Palestine. The Government of India despite Israeli barbaric actions by thinking that after all is what restraints that existing Government . MODI Government indirectly says that Israel is a close ally of India and they can not condemn Israel. In the early 1990s Congress government betrayed the Palestine liberation struggle and started diplomatic relationship with Israel and which was extended by the Vajpayee Government .

Exited the Humanity and sympathy from NDA led Indian Government

Manmohan Singh had cleared all barrier and and enhance business is engaged in academic and defense deal with the Jewish. Silence of the Government basically Because that it is not yet able to see the media and not from the defence intelligence enhances the general public also has Israeli intervention. The same is the result of the last days are performing social workers on the Israeli Embassy, police had charged that sticks the next day in the Israeli Ambassador to India thanks Government of India for supporting their government.

Any nation’s foreign policy is always consistent with economy. Western dominated capitalism is laying the root of radical and fascist Government can choose the same which are not yet up to peace and justice loving citizen, they consider that the incoming ethnic native propaganda. What an colonial killer in our society and so is increasing, It’s a hallmark including innocent children in Gaza genocide on innocent snake got to see rikon. People who speak less on political issues but at least the Gaza issue on its vessels would break and say a few words against the the killings of innocent Palestinians. Such the poor Palestinians can get their rights on their own home land.

Original Hindi version 

एनडीए सरकार में हुई करुणा की बिदाई

नॉएडा , १७ जुलाई -२०१४,वसीम अकरम त्यागी:

फिलस्तीन में पिछले सप्ताह भर से जारी इजरायली बम बारी के हस्तक्षेप में भारत सरकार ने दो टूक कह दिया कि हम इन हमलों की निंदा तक नहीं करेंगे। भले ही सदन में मौजूद दूसरे दलों के सद्स्य फिलस्तीनियों के दुख से दुखी हों, मगर एनडीए सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। सरकार ने गाजा नरसंहार पर विरोध प्रस्‍ताव लाने से साफ इंकार कर दिया सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविता कृष्‍णपल्‍लवी ने कहा कि गुजरातके कसाई और गाजा के कसाई आपस में भाई-भाई हैं, यह सच्‍चाई एकदम खुलकरसामने आ गयी। कल भारत और पूरी दुनिया में गाजा नरसंहार विरोधी जनप्रदर्शनों के माहौल को देखते हुए, शर्माशर्मी मेंसंसद में बैठे विपक्षीदलों ने इस्रायली हमलों के खिलाफ सदन द्वारा प्रस्‍ताव पारित करने की माँगरखी तो भाजपा सरकार के संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

हालांकि समाजिक कार्यकर्ता अविनाश कुमार पांडे कहते हैं कि किसी देश ही नहीं बल्कि किसी भी न्यायप्रिय इंसान तक के लिए इजरायल के गाजा पर हमलों में मारे जा रहे निर्दोष नागरिकों के लिए हमदर्दी होना स्वाभाविक है. पर फिर, यह स्वाभाविकता तो न्यायप्रियता से ही आएगी न. इसीलिए कोई आश्चर्य नहीं कि भारत के बीते छह दशक से ज्यादा फिलिस्तीन के साथ खड़े रहने के बाद वर्तमान एनडीए सरकार ने इन हमलों के खिलाफ कोई कार्यवाही करना तो दूर निंदा करने तक से इनकार कर दिया. बेशक विदेश विभाग के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान में गाजा में हवाई हमलों में मारे जा रहे नागरिकों को लेकर चिंता व्यक्त की है पर फिर उसे सीमा के इस पार से उकसावे की कार्यवाही के साथ खड़ा कर उसने अपनी वर्षों की साख गंवाई ही है. समर कहते हैं कि हास्यास्पद स्थिती यह है कि इस पर भी भारत में इजरायल के कार्यवाहक राजदूत याहेल विलान ने अफ़सोस जताते हुए भारत से ‘आक्रमणकारी और आत्मरक्षा कर रहे लोगों में साफ़ साफ़ अंतर’ करने की मांग की है. बेशक भारत को यही करना चाहिए और साफ़ करना चाहिए कि आक्रमणकारी इजरायल है औरहमले तुरंत रोके जाएँ. फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले पहले देश के बतौर, यासिर अराफात के दिल में रहने वाले देश के बतौर इससे कम किसी भी चीज से काम नहीं चलेगा।

Israel
इजरायली आंकवाक को प्रदर्शित करतीं फिलस्तीनी नागरिकों की तस्वीरें

गौरतलब है कि अब तक इन हमलों में दो से अधिक लोग मारे गये हैं जिनमें एक बड़ी तादाद उन मासूमों की है जिन्हें ये मालूम ही नहीं कि उनकी लड़ाई क्यों और किससे हो रही है। सोशलल सोईटों पर, और फिलस्तीन टीवी पर मानवता को शर्शार करने वाली तस्वीरें प्रत्येक घंटे अपलोड हो रही है। जो यह बताने के लिये काफी हैं कि किस तरह इजरायली आतंकवाद फिलस्तीन में कहर बरपा कर रहा है। इस सबरे बावजूद भारत सरकार का इजरायल के प्रति झुकाव सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर एसी कौनसी मजबूरी है जिसकी वजह से मौजूदा सरकार फिलस्तीनियों की मौत के प्रति कोई कड़ा रुख अख्तियार नहीं कर रही है। हो न हो कहीं मोदी सरकार इजरायली कंपनी एपको जिसने मोदी का प्रचार किया था का अहसान चुका रही हो।वैसेकांग्रेस से भी इस मसले पर ज्यादा कुछ कहने की उम्मीद नहीं की जा सकती । क्योंकि नवउदारवादी लहर मेंबहने के बाद, बढ़़ते अमेरिकी प्रभाव के दौर में, 1990 के दशक में कांग्रेससरकार ने ही फिलिस्‍तीनी मुक्ति संघर्ष के साथ विश्‍वासघात करते हुएइस्रायल के साथ नजदी‍कियाँ बढ़ाने की शुरुआत की थी, जिसे अटल बिहारीवाजपेयी की सरकार ने आगे बढ़ाया। मनमोहन सिंह की सरकार भी इस्रायल के साथराजनयिक और व्‍यापारिक सम्‍बन्‍धों को बढ़ाने में लगी रही। यही नहीं, इस्रायल के साथ रक्षा सौदे भी हुए और जासूसी तंत्र को दुरुस्‍त करने में भीउसकी मदद ली गयी। यह सरकार की चुप्पी की असल वजह है जिसे अभी तक न मीडिया देख पाया है और न आम जनता रक्षा सौदों से लेकर खुफिया एजिंसों में भी इजरायली हस्तक्षेप बढ़ा है। उसी का नतीजा है कि पिछले दिनों इजरायली दूतावास पर प्रदर्शन कर रहे समाजिक कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठी चार्ज किया था। जिसे अगले दिन भारत में इजरायली राजदूत ने भारत सरकार का शुक्रिया अदा करते हुऐ कहा था कि वे भारत सरकार को उनके साथ आने के लिये सलाम करते हैं। यह बयान कई अखबारों में प्रकाशित हुआ था।

किसी भी देश की विदेश नीति हमेशा उसकी आर्थिकनीतियों के ही अनुरूप होती है। पश्चिमी साम्राज्‍यवादी पूँजी के लिए पलकपाँवड़े बिछाने वाली धार्मिक कट्टरपंथी फासिस्‍टों की सरकार से यही अपेक्षाथी कि वे जियनवादी हत्‍यारों का साथ दें।उन्‍होंने अपना पक्ष चुनलिया है और हमने भी। जो इंसाफपसंद नागरिक अबतक चुप हैं, वे सोचें कि आनेवाली नस्‍लों को, इतिहास को और अपने ज़मीर को वे क्‍या जवाब देंगे।हमारे समाज में हृदयहीनता और संवेदनशून्‍यता किस कदर बढ़ती जा रही है, इसकी एक बानगी गाज़ा में मासूम बच्‍चों समेत निर्दोष नाग‍रिकों के नरसंहार के मसले पर देखने को मिली। जो लोग राजनीतिक मसलों पर कुछ बोलते नहीं लेकिन कम से कम इस मसले पर अपनी चुप्‍पी तोड़ें और इज़रायल की इस मानवद्रोही करतूत के ख़िलाफ़ दुनिया भर में उठ रही आवाज़ से अपनी आवाज़ मिलाकर इस इंसाफ़ की आवाज़ को बुलन्‍द करें।

2 comments

  1. তৃণমূল সাংসদ সৌগত রায় বলেন, “গাজায় নিরীহ মানুষ এমনকি শিশুদের অমানবিকভাবে হত্যা করা হচ্ছে। কিন্তু, আশ্চর্যজনকভাবে চুপ করে আছে ভারত সরকার। ভাবতে লজ্জা হচ্ছে এটা মহাত্মা গান্ধীর দেশ।“
    [ TMC MP Prof. Saugata Roy says, ” Innocent civil Palestinian are killing in Gaza even children too but Indian Govt is still silent ,it is doubted that India is the country of Mahatma Gandhi ” ]

  2. Why the Government refuses to pass Resolution Condemning Israel for Gaza attacks?

    Despite strong demands from almost all the opposition parties to adopt a strong resolution in the Parliament against the inhuman attacks by Israel on the innocent people in Gaza, Palestine, killing hundreds of women and children, the government refused the same.
    Palestine is a long time friend of India. India has always stood with Palestine in their time of need.
    It is unfortunate that the government did not accept the demand of the opposition. It is not an issue of nicety of foreign relations,
    but an issue of life and death for a country and its people. The government has to condemn the Israel attacks on the people of Gaza.