Four live bombs seized in Kolhapur, four Electric Engineers students arrested

Kolhapur,7 April-2014(IANA/PTI): The Kolhapur police seized four live bombs and other bomb-making material in Hatkanangle in Kolhapur on Saturday, and arrested four youths on Sunday. These four youths made the bombs for a team of policemen who posed as customers to lay a trap for them. Two of the arrested youth are electrical diploma students.

Four live bombs seized in Kolhapur, four Electric Engineers students arrested

English: This is the temple of Mahalakshmi in ...

Mahalakshmi in Kolahpur city and is a famous pilgrimage center in Maharashtra(credit: Wikipedia)

Police have ruled out any foul play. “They probably only intended to make some quick buck. But we are investigating all possible angles,” Kolhapur Deputy Superintendent of Police Manoj Kumar told The Hindu.

The initial reports of recovery of bombs in Kolhapur caused some anxiety on the background of Bharatiya Janata Party leader Narendra Modi’s upcoming rally in the neighbouring Sangli district. But the police have ruled out any election-related sabotage plans.

They said that none of the four youths had any criminal background, and so far there was nothing to suggest that they had sold the bombs to anyone else other than the police team.

The names of the arrested youths are — Ajinkya Bhople (22), Aniket Mali (22), Nilesh Patil (20) and Anil Khadse (26). Of them, Ajinkya and Aniket are students of electrical diploma, while Nilesh and Anil worked as suppliers. Hatkanangle lies close to Maharashtra-Karnataka border.

The police also seized gelatin sticks, wires, detonators from the house of one of the accused. “They learnt from the internet about the method of making bombs. Initial investigation reveals that these boys thought they could sell the bombs to some dacoits or thieves who intend to break open the lockers,” Mr Kumar said.

He said a police team came to know about them, and put them under the radar. They then deployed a team of policemen who acted as customers and demanded four live bombs. The police arrested the youths before they could deliver the bombs to the team.

Here a analysis report of this bomb recovery from a concern journalist Wasim Akram Tyagi

क्योंकि तुम ‘मोहम्मद महरूफ’ नहीं ‘निलेश पाटिल’ हो ! चुनावों के एन मौके पर कोल्हापुर जिले के कागल में पुलिस ने चार बम बरामद किए है। साथ ही यह बम बनाने वाले चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। कागल शहर से सटे एमआईडीसी के लक्ष्मी टेक इलाके में कागल पुलिस ने छापामारी कर कार्रवाई की। बम मिलने की घटना से कोल्हापुर में खलबली मची है। सवाल यह पैदा होता है कि मुख्यधारा की जो मीडिया है चाहे वह इलैक्ट्रॉनिक मीडिया हो, प्रिंट हो, या फिर वेब मीडिया ही क्यों न हो कहीं पर कोई हलचल इन गिरफ्तारियों को लेकर नहीं हो रही है उसकी क्या वजह है ?

कागल पुलिस ने जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है उनकी शिनाख्त निलेश पाटिल (20) अनिकेत माली (22) अजिन्कया भोपले (22) अनिल खाडसे (26) के रूप में हुई है। मगर मुख्यधारा की मीडिया विशेषकर हिंदी मीडिया के लिये यह कोई खबर ही नहीं है। एक बड़े प्रतिष्ठित अखबार दैनिक भाष्कर ने तो इस खबर को सिंगल कॉलम में देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया मगर चारों आरोपियों के नाम प्रकाशित न करके अखबार ने अपना नजरिया भी साफ कर दिया कि आतंकवादी सिर्फ वही है जिसके चेहरे पर दाढ़ी और सर पर टोपी है। बीते महीने जब जयपुर से इंडियन मुजाहिदीन के चार संदिग्ध को दिल्ली स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया था तब इसी अखबार ने लिखा था, कि (इंडियन मुजाहिदीन के चार आतंकवादी गिरफ्तार मकान मालिक के सामने पढ़ते थे कुरआन) इतना ही नहीं तेज तर्रार पत्रकारों ने उन चारों की कुंडली तक खंगाल डाली थी, क्या खाते थे, क्या पहनते थे, कहां जाते थे, किसको मारने आये थे आदी। अगले दिन वह खबर राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों में पहले पृष्ठ पर थी, और न्यूज चैनलों का हाल तो आप सभी जानते हैं कि किस तरह एंकर चीख चीख कर इंडियन मुजाहिदीन का खौफ पैदा कर रहे थे।

अब जबकि चार जिंदा बम विस्फोटों के साथ उनको बनाने के आरोपी इंजीनियरिंग के छात्रों को गिरफ्तार किया जा चुका है कहीं भी किसी तरह की कोई हलचल कोई वार्ता, होती नहीं दिख रही है आखिर यह दौगलापन नहीं है तो और क्या है ? एक तरफ यही मीडिया केवल शक के आधार पर उठाये गये किसी मोहम्मद उजैर, अल्ताफ, खालिद आदी को तुरंत देश विदेश में आतंकवादी बना देती है, साल दस बाद जब उन पर लगाये गये आरोप सिद्ध नहीं हो पाते और वे बरी हो जाते हैं तब यही मीडिया न तो उनसे माफी मांगता और उनकी रिहाई की खबर को भी एक कोने में लगाकर आजाद हो जाता है। यह है भारतीय मीडिया का दोहरा चरित्र जो हिंदुत्वादियों से भी ज्यादा खतरनाक है। जरा सी देर में पूरे मुस्लिम समुदाय को कटघरे में खड़ा करने वाला मीडिया भगवा आतंकवाद पर खामोश हो जाता है जिसकी खामोशी से साफ जाहिर होता है कि हिंदी मीडिया कितनी निस्पक्ष है ? और किस कद्र क्रूर, सांप्रदायिक, कुंठित, और गंदी मानसिकता से ग्रस्त है ? लेकिन उससे भी ज्यादा तकलीफ इस बात की है कि समाज के तथाकथित बुद्धीजीवी वर्ग भी मीडिया के इस दुष्प्रचार पर खामोशी का ताला लगा लेते हैं, जिससे सांप्रदायिक मीडिया को और अधिक बल मिलता है संप्रदाय विशेष को बदनाम करने के लिये। लानत है ऐसी गटरछाप और गंदी पत्रकारिता पर जिसकी नजर में मोहमम्द महरूफ तो आतंक का सरगना है और निलेश पाटिल जो बम बनाता है वह एक निर्दोष छात्र यह कब तक तक चलेगा ? मानना होगा कि मीडिया, पुलिस, जांच एजंसियों ने एक अघोषित युद्ध मुसलमानों के खिलाफ छेड़ रखा है। जो आंतकित करके संप्रदाय विशेष को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं। एक लोकतांत्रिक सैक्यूलर देश में इस तरह की घटनाओं का होना फांसीवादी ताकतों के लिये रास्ता साफ करने जैसा है। क्योंकि फांसीवादी ताकतों का जो कार्य है उसकी तर्जुमानी हिंदी मीडिय कर रहा है। [Input source: Wasim Akram Tyagi ]

One Response to Four live bombs seized in Kolhapur, four Electric Engineers students arrested

  1. हिंदुत्ववादियों से भी ज्यादा खतरनाक है मीडिया का दोहरा चरित्र

    चार तथाकथित राष्ट्रवादियों को बम बनाते हुऐ गिरफ्तार किया गया है। मीडिया तो इस पर खामोश है ही लेकिन सबसे अधिक हैरानी इस बात की है सोशल साईट्स पर देश प्रेम, और खुद को सैक्यूलर कहने वालों की जुबां भी खामोश हो गई है। ऐसा क्यों है यह तो मैं नहीं जानता मगर इतना जरूर जानता हूं कि खामोश रहकर इन तथाकथित राष्ट्र भक्तों के आतंकवाद का समर्थन किया जा रहा है, जो सैक्यूलरिज्म के लिये सबसे बड़ा खतरा है। जब कोई विरोध करने वाला ही न रहे तो समझ लीजिये कि ऐसी ताकतों को हाहाकार मचाने से कोई नहीं रोक सकता। क्या यही बुद्धीजीवी वर्ग नहीं था जो पिछले माह आतंकवाद, सिमी, आईएम, आदी जैसे कथित आतंकवादी संगठनों पर घंटों चैनलों के स्टूडियो में बैठा मिलता है। मगर आज किसी भी ओर से कोई आवाज नहीं आ रही है। आखिर क्यों है यह खामोशी, यह भी एक तरह का आतंकवाद ही है जो खामोश रहकर आतंकवादियों का समर्थन कर रहा है। कुछ ऐसी ही खामोशी उस वक्त थी जब कारवां के संपादक विनोद के. दोसे द्वारा किये गये खुलासे में संघ प्रमुख मोहन भागवत का नाम आया था और उसी का नतीजा है कि इस तथाकथित बुद्धजीवी वर्ग, सैक्यूलरिज्म के अलंबरदारो, अमन पसंदों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई और भागवत आज तक बाहर घूम रहे हैं। बगैर किसी अपील, दलील, गवाह, वकील, के मुस्लिम नौजवानों को आतंकवादी बताने वाले मीडिया को आज क्या हो गया ? क्या इसलिये खामोशी है कि उनके नाम वे नहीं हैं जिनकी इन्हें जरूरत रहती है। भारतीय पुलिस व्यवस्था जवाब दे, गृहमंत्री जवाब दें कि प्रोफेसर गिलानी, एसएमऐ काजमी, को आतंकवाद के झूठे आरोप में फंसाकर उन्हें सालों में जेलों में सड़ाने वाली पुलिस ने इन तथाकथित राष्ट्र भक्तों के खिलाफ क्या एक्शन लिया है ?